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समाचार
आनलाइन शिक्षा - सबको लाभप्रद
शिक्षा के नाम पर बच्चों को हमेशा सताने वालो माँ-बापों का जमाना बीत चुका है। आजकल के माँ-बाप चाहते हैं कि कला और खेल जगत में भी अपनी संतान अग्रणी रहें। बाल-बालिकाएं संगीत, नाट्य, चित्रकला, खेलकूद - सब क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन, माँ-बाप के कहीं स्थानांतरित हो जाना जैसी बाधाएं इन्हें घेर लेती हैं।

कंप्यूटर युग का नए द्‌वार…
कलाओं में अभिरुचि होने पर भी प्रशिक्षण केंद्रों से बहुत दूर बसने अथवा शिक्षा, परीक्षा आदि कारणों से भी बच्चे कलाओं से वंचित रह जाते हैं। ये कलाएं सिखाकर, रोजी कमाने वाले गुरु भी विद्यार्थियों के अभाव से दुखी रहते हैं। आज के कंप्यूटर युग ने इन सबके लिए नए द्‌वार खोल दिए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी की सामर्थ्य में वृद्धि, कम दाम पर कंप्यूटर मिलना, इंटरनेट ब्राड-बैण्ड सुविधा उपलब्ध होना आदि के परिणामस्परूप आनलाइन गुरु-शिष्य संबंध का बीज बोया गया हैं। यह प्रक्रिया यें हैं:

दृश्य एवं श्राव्य पद्‌धति…
शिक्षक और गुरु वेब-साइट खोलकर दुनिया को अपना परिचय देते हैं। वेब-साइट के जरिए शिक्षकों, गुरुओं की जानकारी हासिल करके विद्यार्थि इनसे संपर्क करते हैं और शिक्षण लेते हैं। जो सुदूर रहते हैं, उनके लिए साफ्टवेयर काफी उपयोगी हैं। आडियो और वीडियो रिकार्डिंग तथा एडिटिंग साफ्टवेयर का उपयोग करके शिक्षक और गुरु ई-मेल, चैटिंग व्यवस्थाओं के जरिए दृश्य एवं श्राव्य (आडियो विजुवल) पद्‌धति में अपने विद्यार्थियों कों शिक्षण देते हैं। फलतः विदेशों में रहने वाले विद्यार्थी भी अपनी अभिरुचि के अनुसार शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। आनलाइन पाठ्‌यक्रमों द्‌वारा गुरुजन भी अपने अस्तित्व को बनाए रखे हैं।

डिजिटल रूप में...
प्रश्न उठता है कि शंकानिवृत्ति कैसे होगी। आनलाइन चाट, वीडियो कान्फेरन्सिंग इसके साधन हैं। आनलाइन शिक्षण का इतना विकास हो चुका है कि आनलाइन पाठ्‍यक्रमों का संचालन करके उपाधि करने वाले वर्चुअल विश्वविद्यालय भी स्थापित हो गए हैं। इतना ही नहीं, हमारे देश में ख्याति-प्राप्त खुले विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा द्‌वारा पढ़ने वाले अपने विदेशि छात्रों के लिए इंटरनेट के जरिए डिजिटल रूप में पाठ उपलब्ध कर रहे हैं।

वर्तमान स्थिति...
इसी माध्यम से अनेक अध्यापक और शिक्षण संस्थाएँ दृश्य, श्राव्य रूपों में शिक्षण देकर गुरुशिष्य संबंध को सुदृढ बना रही हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शोध-के क्षेत्रों में आनलाइन शिक्षण का महत्व बढ़ गया हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि अनेक भारतीय अध्यापक विदेशी छात्रों को गणित, विज्ञान आदि पढाकर हज़ारो डालर कमा रहे हैं। आनलाइन शिक्षण की मांग बढ़ गई हैं। फिलहाल चेन्नै में संपन्न हो रहे संगीत समारोह में अनेक आनलाइन गुरु प्रकाश में आए हैं। वे अपनी आनलाइन शिक्षण संबंधी वेबसाइट, पाठों के बारे में विज्ञापनों के द्‌वारा खुद का प्रचार कर रहे हैं।
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